नर नाहर में अब क्या अन्तर ?


Shayari    ||     Hindi Shayari

नर नाहर में अब क्या अन्तर ?

नाहर निज क्षुधा तृप्ति के वश, होकर मृगया कर लेता है।
पर मानव क्यों दानव बनकर निर्मम हत्या कर देता है ?

क्या यही धर्म का पालन है ? क्या यही सृष्टि का नियमन है ?
या यह तृष्णा की साजिश है, या हैवानों की मजलिस है !

क्यों मानव ही मानव को अब नित नई यातना देता है?
सब एक पिता की सन्तति हैं कयों यह विस्मृत कर देता है।

क्यों सृष्टि-स्वरूपा आदि शक्ति कन्या भोग्या बन जाती है? 
निर्दोष, दीन मानवता अब दर- दर की ठोकर खाती है ।

क्या यही प्रगति का लक्षण है? क्या यही सभ्यता है युग की ?
क्या यही मार्ग है उन्नति का ? क्या यही नियति है इस जग की !

अब भी यदि नहीं रुका सब तो ब्रह्मांड हमें धिक्कारेगा !
फिर 'मानव' क्या ''दानव'' कह भी 
क्या ! कोई हमें पुकारेगा ?

 






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नर नाहर में अब क्या अन्तर ?

नर नाहर में अब क्या अन्तर ?

नाहर निज क्षुधा तृप्ति के वश, होकर मृगया कर लेता है।
पर मानव क्यों दानव बनकर निर्मम हत्या कर देता है ?

क्या यही धर्म का पालन है ? क्या यही सृष्टि का नियमन है ?
या यह तृष्णा की साजिश है, या हैवानों की मजलिस है !

क्यों मानव ही मानव को अब नित नई यातना देता है?
सब एक पिता की सन्तति हैं कयों यह विस्मृत कर देता है।

क्यों सृष्टि-स्वरूपा आदि शक्ति कन्या भोग्या बन जाती है? 
निर्दोष, दीन मानवता अब दर- दर की ठोकर खाती है ।

क्या यही प्रगति का लक्षण है? क्या यही सभ्यता है युग की ?
क्या यही मार्ग है उन्नति का ? क्या यही नियति है इस जग की !

अब भी यदि नहीं रुका सब तो ब्रह्मांड हमें धिक्कारेगा !
फिर 'मानव' क्या ''दानव'' कह भी 
क्या ! कोई हमें पुकारेगा ?

 

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खुद को ख़ुदा कहा और खुद ही ख़ुदा हो गए,

खुद को ख़ुदा कहा और खुद ही ख़ुदा हो गए,
रिश्तों की कशमकश में खुद से जुदा हो गए !
बांचते रहे तमाम उम्र आईने में अपनी सूरत,
तन्हा रहे जिंदगी में और भीड़ में ही खो गए !!

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कामयाबी कभी बड़ी नही होती,

पाने वाले हमेशा बड़े होते है.
दरार कभी बड़ी नही होती,
भरने वाले हमेशा बड़े होते है.
इतिहास के हर पन्ने पर लिखा है,
दोस्ती कभी बड़ी नही होती,
निभाने वाले हमेशा बड़े होते है

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मे तोड़ लेता अगर तू गुलाब होती

मे जवाब बनता अगर तू सबाल होती
सब जानते है मैं नशा नही करता,
मगर में भी पी लेता अगर तू शराब होती!

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पलकों को कभी हमने भिगोए ही नहीं,

वो सोचते हैं की हम कभी रोये ही नहीं,
वो पूछते हैं कि ख्वाबो में किसे देखते हो?
और हम हैं की उनकी यादो में सोए ही नहीं!

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कोई रास्ता नही दुआ के सिवा

कोई सुनता नही खुदा के सिवा
मैने भी ज़िंदगी को करीब से देखा है मेरे दोस्त
मुस्किल मे कोई साथ नही देता आँसू के सिवा

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बहुत खूब सूरत है आखै तुम्हारी

इन्हें बना दो किस्मत हमारी
हमें नहीं चाहिये ज़माने की खुशियाँ
अगर मिल जाये मोहब्बत तुम्हारी

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निकलते है तेरे आशिया के आगे से,सोचते है की तेरा दीदार हो जायेगा,

खिड़की से तेरी सूरत न सही तेरा साया तो नजर आएगा

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दोस्ती करो BSNL वाली से

प्यार करो IDEA वाली से.
बात करो airtel वाली से.
आँख लड़ाओ vodafone वाली से.
पर दोस्तो
शादी करना बिना मोबाइल वाली से.

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एक माँ ऐसी भी होती है

घुंगरू की जंजीर में बंधी होती है
ज़माने की जेल में उसे तबायफ
रहने के सजा मिली होती है !

दिल उसका खून के आंसु रोता है
आँखे सहरा जैसे सूख गयी होती है
अपने बच्चे को स्कूल भेजकर नए नए
सपने संजो रही होती है ! एक माँ ……..

समाज के ठेकेदारों ने ऐसा कर दिया
एक बेबुस को वैश्या कर दिया
अपने बच्चे को ख़ुशीया देने वास्ते
हर जुल्मो – सितम सह रही होती है!

तू कल जब बड़ा हो जायेगा
अपनी मंजिल अपना मुकाम पायेगा
तू कही उस माँ को छोड़ न दे
इस डर से मेरी कलम आगे लिख पति है ! एक माँ

 

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मेरे दिल की दुनिया पे तेरा ही राज था।

मेरे दिल की दुनिया पे तेरा ही राज था।
कभी तेरे सीर पर भी वफाओ का ताज था।
तूने मेरा दिल तोडा पर पता न चला तुझको।
क्योंकि टुटा दिल दीवाने का बे आवाज था। ...

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तकदीर लिखने वाले एक एहसान लिख दे,

मेरे दोस्त की तकदीर में मुस्कान लिख दे,
ना मिले जिन्दगी में कभी भी दर्द उसको,
चाहे उस की किस्मत में मेरी जान लिख दे.. ...

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जख्म बन जाने की आदत है उसकी,

रूला कर मुस्कुराने की आदत है उसकी,
मिलेगें कभी तो खूब रूलाएगें उसको,
सुना है रोते हुए लिपट जाने की आदत है उसकी..!! ...

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जख्म बन जाने की आदत है उसकी,

रूला कर मुस्कुराने की आदत है उसकी,
मिलेगें कभी तो खूब रूलाएगें उसको,
सुना है रोते हुए लिपट जाने की आदत है उसकी..!! ...
 

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कौन कहता है हम उसके बिना मर जायेंगे....
हम तो दरिया है समंदर में उतर जायेंगे
वो तरस जायेंगे प्यार की एक बून्द के लिए...
हम तो बादल है प्यार के…
किसी और पर बरस जायेंगे । 

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न सोचा न समझा न सीखा न जाना,

मुझे आ गया ख़ुदबख़ुद दिल लगाना..!!
ज़रा देख कर अपना जल्वा दिखाना,
सिमट कर यहीं आ न जाये ज़माना..!!
ज़ुबाँ पर लगी हैं वफ़ाओं कि मुहरें,
ख़मोशी मेरी कह रही है फ़साना..!!
गुलों तक लगायी तो आसाँ है लेकिन,
है दुशवार काँटों से दामन बचाना..!!
 

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दुनिया में तेरा हुस्न मेरी जां सलामत रहे,
सदियों तलक जमीं पे तेरी कयामत रहे,
और भी दुनिया में आएंगे आशिक कितने,
उनकी आंखों में तुमको देखने की चाहत रहे,
इश्क के तमाशे में हमेशा तेरे किरदार से ,
दर्द और खामोशी के अश्कों की शिकायत रहे,
खुमारियों के चंद लम्हों का है तेरा सुरूर,
उसमें डूबकर मरने से दिल को राहत .....................

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हमने उम्र गुजारी है तुम्हारी ख़ामोशी पड़ते हुए

kaash vo aae aur hamen dekh kar kahe ki ham mar gae hai jo tum itane udaas ho

hamane umr gujaaree hai tumhaaree khaamoshee padate hue ,

ab ek umr guzaar denge tumhe mahasoos karate hue

aansoo chhipa lie hamane ye sochakar

kyon kisee ko udaas karana khud udaas rahakar

kaun kahata hai kuchh tonane ke lie patthar jarooree hai. …

lahaja badal kar bolane se bhee bahut kuchh toot jaata hai..