जिंदगी भर दर्द से जीते रहे . दरिया पास था आंसुओं को पीते रहे


Shayari    ||     Heart touching Shayari

जिंदगी भर दर्द से जीते रहे ..
दरिया पास था आंसुओं को पीते रहे..
कई बार सोंचा कह दू हाल-ए-दिल उससे..
पर न जाने क्यूँ हम होंठो को सीते रहे..

-------------------------------------------------------------

बिन बात के ही रूठने की आदत है..

किसी अपने का साथ पाने की चाहत है..
आप खुश रहें, मेरा क्या है..
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है.

--------------------------------------------------------------

थोडा सा किसी की मुलाकात में भी रहना .

एक वक़्त किसी की आँख में भी रहना ..
यहाँ एक दिल को सौ खंजर ताकते है ..
कभी कभी अपने आप में भी रहना.

-------------------------------------------------------------

लम्हा लम्हा सांसें ख़तम हो रही हैं ..

ज़िंदगी मौत के पहलू में सौ रही है ..
उस बेवफा से ना पूछो मेरी मौत की वजह ..
वो तो ज़माने को दिखाने के लिए रो रही है

------------------------------------------------------------------

क्यो किसी से इतना प्यार हो जाता है,

एक पल का इंतज़ार भी दुश्वार हो जाता है,
लगने लगते है अपने भी प्यारे,
और एक अजनबी पर ऐतबार हो जाता है

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मुल्क तेरी बर्बादी के आसार नज़र आते है ,

चोरों के संग पहरेदार नज़र आते है
ये अंधेरा कैसे मिटे , तू ही बता ऐ आसमाँ ,
रोशनी के दुश्मन चौकीदार नज़र आते है
हर गली में, हर सड़क पे ,मौन पड़ी है ज़िंदगी
हर जगह मरघट से हालात नज़र आते है
सुनता है आज कौन द्रौपदी की चीख़ को हर
जगह दुस्साशन सिपहसालार नज़र आते है
सत्ता से समझौता करके बिक गयी है लेखनी
ख़बरों को सिर्फ अब बाज़ार नज़र आते है
सच का साथ देना भी बन गया है जुर्म अब
सच्चे ही आज गुनाहगार नज़र आते है
मुल्क की हिफाज़त सौंपी है जिनके हाथों मे
वे ही हुकुमशाह आज गद्दार नज़र आते है
खंड खंड मे खंडित भारत रो रहा है ज़ोरों से
हर जाति , हर धर्म के, ठेकेदार नज़र आते है






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Shayari    ||     Heart touching Shayari

जिंदगी भर दर्द से जीते रहे . दरिया पास था आंसुओं को पीते रहे

जिंदगी भर दर्द से जीते रहे ..
दरिया पास था आंसुओं को पीते रहे..
कई बार सोंचा कह दू हाल-ए-दिल उससे..
पर न जाने क्यूँ हम होंठो को सीते रहे..

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बिन बात के ही रूठने की आदत है..

किसी अपने का साथ पाने की चाहत है..
आप खुश रहें, मेरा क्या है..
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है.

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थोडा सा किसी की मुलाकात में भी रहना .

एक वक़्त किसी की आँख में भी रहना ..
यहाँ एक दिल को सौ खंजर ताकते है ..
कभी कभी अपने आप में भी रहना.

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लम्हा लम्हा सांसें ख़तम हो रही हैं ..

ज़िंदगी मौत के पहलू में सौ रही है ..
उस बेवफा से ना पूछो मेरी मौत की वजह ..
वो तो ज़माने को दिखाने के लिए रो रही है

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क्यो किसी से इतना प्यार हो जाता है,

एक पल का इंतज़ार भी दुश्वार हो जाता है,
लगने लगते है अपने भी प्यारे,
और एक अजनबी पर ऐतबार हो जाता है

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मुल्क तेरी बर्बादी के आसार नज़र आते है ,

चोरों के संग पहरेदार नज़र आते है
ये अंधेरा कैसे मिटे , तू ही बता ऐ आसमाँ ,
रोशनी के दुश्मन चौकीदार नज़र आते है
हर गली में, हर सड़क पे ,मौन पड़ी है ज़िंदगी
हर जगह मरघट से हालात नज़र आते है
सुनता है आज कौन द्रौपदी की चीख़ को हर
जगह दुस्साशन सिपहसालार नज़र आते है
सत्ता से समझौता करके बिक गयी है लेखनी
ख़बरों को सिर्फ अब बाज़ार नज़र आते है
सच का साथ देना भी बन गया है जुर्म अब
सच्चे ही आज गुनाहगार नज़र आते है
मुल्क की हिफाज़त सौंपी है जिनके हाथों मे
वे ही हुकुमशाह आज गद्दार नज़र आते है
खंड खंड मे खंडित भारत रो रहा है ज़ोरों से
हर जाति , हर धर्म के, ठेकेदार नज़र आते है

Story    ||     Heart touching Shayari

बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया

बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया ..

इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गया
मैं आज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा …

जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है …..
आज मैं पापा का पर्स भी उठा लाया था …. जिसे किसी को हाथ तक न लगाने देते थे …

मुझे पता है इस पर्स मैं जरुर पैसो के हिसाब की डायरी होगी ….
पता तो चले कितना माल छुपाया है …..
माँ से भी …

इसीलिए हाथ नहीं लगाने देते किसी को..

जैसे ही मैं कच्चे रास्ते से सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है ….
मैंने जूता निकाल कर देखा …..
मेरी एडी से थोडा सा खून रिस आया था …
जूते की कोई कील निकली हुयी थी, दर्द तो हुआ पर गुस्सा बहुत था ..

और मुझे जाना ही था घर छोड़कर …

जैसे ही कुछ दूर चला ….
मुझे पांवो में गिला गिला लगा, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था ….
पाँव उठा के देखा तो जूते का तला टुटा था …..

जैसे तेसे लंगडाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक कोई बस नहीं थी …..

मैंने सोचा क्यों न पर्स की तलाशी ली जाये ….

मैंने पर्स खोला, एक पर्ची दिखाई दी, लिखा था..
लैपटॉप के लिए 40 हजार उधार लिए
पर लैपटॉप तो घर मैं मेरे पास है ?

दूसरा एक मुड़ा हुआ पन्ना देखा, उसमे उनके ऑफिस की किसी हॉबी डे का लिखा था
उन्होंने हॉबी लिखी अच्छे जूते पहनना ……
ओह….अच्छे जुते पहनना ???
पर उनके जुते तो ………..!!!!

माँ पिछले चार महीने से हर पहली को कहती है नए जुते ले लो …
और वे हर बार कहते “अभी तो 6 महीने जूते और चलेंगे ..”
मैं अब समझा कितने चलेंगे

……तीसरी पर्ची ……….
पुराना स्कूटर दीजिये एक्सचेंज में नयी मोटर साइकिल ले जाइये …
पढ़ते ही दिमाग घूम गया…..
पापा का स्कूटर ………….
ओह्ह्ह्ह

मैं घर की और भागा……..
अब पांवो में वो कील नही चुभ रही थी ….

मैं घर पहुंचा …..
न पापा थे न स्कूटर …………..
ओह्ह्ह नही
मैं समझ गया कहाँ गए ….

मैं दौड़ा …..
और
एजेंसी पर पहुंचा……
पापा वहीँ थे ……………

मैंने उनको गले से लगा लिया, और आंसुओ से उनका कन्धा भिगो दिया ..

…..नहीं…पापा नहीं…….. मुझे नहीं चाहिए मोटर साइकिल…

बस आप नए जुते ले लो और मुझे अब बड़ा आदमी बनना है..

वो भी आपके तरीके से …।।

“माँ” एक ऐसी बैंक है जहाँ आप हर भावना और दुख जमा कर सकते है…

और

“पापा” एक ऐसा क्रेडिट कार्ड है जिनके पास बैलेंस न होते हुए भी हमारे सपने पूरे करने की कोशिश करते है……..

 

मैं अपने पेरेंट्स से प्यार करता हुँ……